जैपर कैसे कार्य करता है?

हम हर रोज हजारों बाहरी रोगजनक प्रभावों के संपर्क में आते हैं जो लगातार हमारे जीवन शक्ति और स्वास्थ्य को कमजोर करते रहते हैं। इस भार का सामना करने के लिए दो सिद्धांत लागू करने चाहिएं :

  • 1. लगातार मुक्ति

    एक आवेश शारीरिक, मनोवैज्ञानिक (और अन्य स्तरों पर) कोई भी असंससाधित, अव्यवस्थित तनाव या जानकारी होती है। प्रत्येक पर्यावरणीय विष, वायु प्रदुषण, तनाव कारक और आधुनिक समय की भागदौड़ से शरीर पर होने वाला दबाव, जिसे संसाधित नहीं किया जा सकता है, एक आवेश उत्पन्न करता है। यदि हम अपने स्वास्थ्य को संतुलित रखना चाहते हैं तो अनिवार्य रूप से हमें दोबारा मुक्त होने के लिए एक तरीका खोजना होता है।

  • 2. एक कार्यकारी डायमण्ड शील्ड (डायमण्ड शील्ड)

    हमारे शरीर में एक अंतर्जात बुना हुआ नेटवर्क होता है जिसका उद्देश्य बाहरी प्रभावों से हमारी सुरक्षा करना है -> शिरोबिंदुओं की ऊर्जात्मक प्रणाली. परंतु, समय के साथ अधिक भार के कारण यह प्रणाली कमजोर पड़ जाती है और ऊपर वर्णित आवेश उत्पन्न हो सकते हैं। इनसे मुक्ति के अलावा हमें अपने महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक शील्ड को स्थाई रूप से पुनर्जीवित और मजबूत बनाने के लिए एक तरीका खोजना पड़ता है।

  • इसलिए इन दो सिद्धांतों के बीच क्या संबंध है?

    ooopserde प्रत्येक शिरोंबिंदु किसी अंग का एक ऊर्जात्मक प्रतिनिधि और कार्यकारी सर्किट होता है और इसे आवंटित सभी आवेशों का परिवहन और नियमन करता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह क्रिया भारी दबाव के अंतर्गत भी कायम रहे, हमें अपनी शिरोबिंदु प्रणाली को इसके कंपन द्वारा सही आवेग प्रदान करना और इसी समय इसे मुक्त करना आवश्यक है।

    इसे समझने के लिए हमारी शिरोबिंदु प्रणाली को किसी बिल्डिंग के अपशिष्ट और ताजा पानी की प्रणाली के रूप में कल्पना करते हैं। बिल्डिंग को ताजे पानी की आपूर्ति करना और इसके साथ ही धूल और अपशिष्ट को सीवरेज प्रणालीमें मुक्त करना आवश्यक है। यदि यह प्रणाली बुरी तरह अवरूद्ध हो जाए और सामान्य माध्यम कार्य नहीं करें तो पलम्बर प्रणाली के साथ एक शेकर जोड़ता है (हमारे मामले में डायमण्ड शील्ड जैपर) कंपन द्वारा नालियों की सफाई करता है। ध्कुड़ा, चूना और अन्य चीजें नालियों की दीवारों से घुलकर सीवरेज प्रणाली (हमारे मामले में, ग्राउंड में मुक्ति) में चले जाते हैं। केवल तभी जब आवृत्ति बिल्कुल सामग्री की प्राकृतिक आवृति तक पहुँच जाती है, समस्त कचरा घुल जाता है। एक अहुत उच्च आवृत्ति कार्य नहीं करेगी और बहुत कम आवृत्ति (धीमी नॉकिंग) भी नहीं करेगी। कचरा (आवेशद्व जो बाहर निकलता है, वह कहां जाता है? अच्छा तो, प्रकृति का सारा कचरा कहां जाता है? जमीनके अंदर! असल, में यह इतना ही आसान है।