जैपर और इसका इतिहास

[title size=”1″ content_align=”left” style_type=”single” sep_color=”” class=”” id=””]From the beginnings of the zapping until today[/title][checklist icon=”fa-caret-right” iconcolor=”#000000″ circle=”no” circlecolor=”” size=”small” class=”” id=””][li_item icon=””]पहला इलेक्ट्रो-एक्युपंक्चर डिवाइस प्रो. डा. रोजर डे ला फुये (1890-1961) द्वारा तैयार किया गया।[/li_item][li_item icon=””]1945 – 1950 डा. आर. राइफ ने रोगजनकों का सामना करना के लिए एक फ्रीक्वेंसी जेनरेटर पर कार्य किया।(देखें बैरी लाइन्स, द कैंसर क्योर दैट वर्कड).[/li_item][li_item icon=””]1950 में डा. रेइनहोल्ड वोल ने इलेक्ट्रो-एक्युपंक्चर के विचार का प्रसार करना शुरू किया, वोल के अनुसार.[/li_item][li_item icon=””]लगभग 1970 में, TENS (ट्रांसक्टिनेस इलेक्ट्रिकल नर्व स्टिम्युलेशन) यूनिट विकसित की गई।[/li_item][li_item icon=””]डा. हुल्दा क्लार्क, एक अमेरिकी बायोफिजिस्ट और फिजियोलॉजिस्ट (जन्म 1929 और मृत्यु 2009) ने 1988/89 में इलेक्ट्रॉनिक प्रतिध्वनि की खोज कीडॉ हुल्दा क्लार्क, क्लार्क-जैपर के आविष्कारक विभिन्न परजीवियों और रोजगनकों (देखें “द क्योर फॉर ऑल डीजिज”)

अपनी पुस्तकों में वह परजीवी लोड और कुछ मामलों में गंभीर और जिद्दी रोगों के बीच में एक संबंध के बारे में बात करती है और उन्होंने एक सिंक्रोमीटर कही जाने वाली जाँच इकाई तैयार की। इस उपकरण की मदद और विशिष्ट आवृत्तियों पर एक प्रतिध्वनि प्रतिक्रिया द्वारा शरीर में एकत्रित प्रदूषकों (जैसे सौंदर्य प्रसाधनों औद्योगिक रूप से तैयार खाद्य पदार्थों या अन्य दैनिक उत्पादों से) के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के विषाणुओंख्‍ जीवाणुओं, परजीवियों और फफंुद की जांच की जा सकती है। डा. क्लार्क के अनुसार वे शरीर के अंगों में स्थापित हो जाते हैं और गंभीर जीर्ण रोगों का कारण हो सकते हैं।

उनके सिद्धांत के अनुसार उक्त प्रदूषक और परजीवी अपने आपको “उनकी” विशिष्ट आवृत्ति पर एक मापनयोग्य प्रतिध्वनि के माध्यम से “प्रकटl” करते हैं। जैपर के साथ सूक्ष्म विद्य़त उत्प्रेरण द्वारा, वर्गाकार तरंगों और एक पॉजिटीव ऑफसेट सहित क्लासिक अनुप्रयोगों के लिए एक उपकरण जिसे उसन्होंने 1994 में तैयार किया था, उपरोक्त आवृत्तियों को कमजोर किया जा सकता है।

उसने अपनी पुस्तक “द’ क्योर फॉर ऑल डिजीज” इसे-स्वयं-करें दिशानिर्देश और विशिष्ट आवृत्तियों में सूक्ष्म विद्युत उत्प्रेरण द्वारा विशिष्ट रूप से विषाक्त पदार्थों और परजीवियों का क्षीण करने और बाहर निकालने की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की है।

उसने उत्सर्जन अंगों को मुक्त करने के लिए (जैसे किडनी, आंत्र या लीवर सफाई) फार्मुले और दिशानिर्देश भी तैयार किए।[/li_item][/checklist][fusion_text]

जैपर और इसके अनुप्रयो के संबंध में उनके अपने शब्द :

…जैपिंग से मेरा मतलब चयनित ढंग से रोगजनकों का विद्युतदहन है. वर्षों तक मैंने एक रोगजनक के बाद दूसरे को “जैप” करने के लिए बाजार में मिलने वाले फ्रिक्वेंसी जेनेरेटर का इस्तेमाल किया है….

1993 में मेरा बेटा जेफ्री मेरे साथ जुड़ गया और हमने एक नये दृष्किोण के लिए प्रयास किया….1994 में उसने हाथ में थामने वाले एक बैटरी चालित परिशुद्ध फ्रीक्वेंसी जेनरेटर का निर्माण किया….इसका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को 434,000 Hz (आंत्र फ्ल्युक की आवृत्ति) पर आंत्र फ्ल्युक को समाप्त करने में सक्षम करना था….जब मैंने इसका परीक्षण मेरे अपने एक जीवाणु पर किया तो हालांकि तीन अन्य बिल्कुल अलग आवृत्तियों वाले भी समाप्त हो गए! इससे पहले यी कभी नहीं हुआ था… जब मैंने इसे अन्यों पर परीक्षण किया तो सभी मर गए, यद्यपि उनमें दर्जनों रोगजनक थे! …यह बैटरी से संचालन के कारण था!…

कोई भी पॉजिटीव ऑफसेट आवृति निश्चित पर्याप्त वोल्टेज (5 से 10 वोल्ट), समयावधि (सात मिनट) और आवृत्ति (10 Hz से 500,000 Hz) पर सभी बैक्टीरिया, विषाणुओं और रोगजनकों को एकसाथ समाप्त कर देती है।…

पॉजिटीव ऑफसेट आवृत्तियां उत्पन्न करना सभी रोगजनकों को शीघ्रता से समाप्त करने का बेहतर तरीका है।”

(द’ क्योर फॉर ऑल डिजीज, 1995)

जैपर के अनुप्रयोग और प्रभाव की व्याख्या डा. क्लार्क इस प्रकार करती हैं :

“…प्रत्येक को समाप्त करने के लिए तीन उपचारों की जरूरत होती है। … पहली जैपिंग विषाणुओं, बैक्टीरिया और परजीवियों को समाप्त करती है। लेकिन कुछ मिनटों के बाद अक्सा बैक्टीरिया और वायरस पुन: उत्पन्न हो जाते हैं.। परजीवियों को मारने पर बैक्टीरिया और वायरस मुक्त होते हैं।

…दूसरी जैपिंग मुक्त हुए विषाणुओं अऔर बैक्टीरिया का मार देती है, लेकिन जल्दी ही कुछ विषाणु दोबारा दिखाई देने लगते हैं…तीसरी जैपिंग के बाद घंटों बाद भी मुझे कोई भी वायरस, बैक्टीरिया या परजीवी नहीं मिला…”

वर्गाकार तरंगयह प्रवृत्ति डा. क्लार्क को स्पष्ट की गई कि वर्गाकार तरंग और पॉजि‍टीव ऑफसेट का सबसे अधिक महत्व है और यह कि परजीवियों और सहजीवियों पर गंभीर प्रभाव डालने के लिए इसकी सही प्राकृतिक आवृत्ति के साथ अनुगूँज प्रभाव एक अनिवार्य शर्त प्रतीत नहीं होती है।

इसका मतलब यह है कि केवल एक सामान्य जैपर (घर में निर्माण के लिए उपयुक्त) चाहिए जिसे केवल एक आवृत्ति पर कार्य करना होगा।

इसका मतलब सामान्य क्लार्क जैपर वर्णित पॉजिटीव ऑफसेट में केवल एक आवृत्ति पर कार्य करती है।

हालांकि, डा. क्लार्क ने अपनी बाद की पुस्तकों में कथित लक्षित जैपिंग का परिचय करवाकर इस कथन का संबंध स्थापित किया, जिसे एक माध्यमिक मेटल प्लेट के साथ प्लेट जैपिंग भी कहा गया है। इस मेटल प्लेट को एक मेप्रकार से फिल्टर के रूप में भी इस्तेमाल किया गया है : एम्पलस या मौलिक पदार्थों के उछाल के रूप में अतिरिक्त जानकारी को इसके ऊपर रखा गया है और सामान्य जैपिंग का विस्तार किया गया है। मूल रूप से प्लेट जैपिंग एक जैव-अनुगूँज थैरेपी के सरलीकृत स्वरूप से अधिक कुछ नहीं है। इसका मतलब सामान्य क्लार्क जैपर वर्णित पॉजिटीव ऑफसेट में केवल एक आवृत्ति पर कार्य करती है।

[/fusion_text][checklist icon=”fa-caret-right” iconcolor=”#000000″ circle=”no” circlecolor=”” size=”small” class=”” id=””][li_item icon=””]1998 में, डा. बैक ने निम्न आवृत्ति थेरेपी (3.92 Hz) के क्षेत्र में अपना अनुसंधान प्रकाशित किया।[/li_item][li_item icon=””]प्राकृतिक स्वास्थ्य पेशेवर ए.ई. बेकलेयन ने आखिरकार 2006 में पहली TREF आवृत्तियों (टैरेन रेग्युलेशन वाया इलेक्ट्रिकल फ्रीक्वेंसिज) की खोज की और 2009 में 24 आवृत्तियों के संघटन को विकसित किया जो शरीर के शिरोबिंदुओं को संतुलन में लाती हैं और उन्हें गोल्डन स्ट्रीम प्रोग्राम के रूप में जाना गया।[/li_item][li_item icon=””]2010 में प्राकृतिक स्वास्थ्य पेशेवर बेकलेयन ने हार्मोनिक फ्रीक्वेंसी थेरेपी की खोज की। इसमें शरीर के सभी ऊर्जा पथों और कार्यप्रणालियों को एक गणितीय संबंध में रखा गया।[/li_item][li_item icon=””]2012 ए. ई. बेकलेयन ने और भी बड़ी खोजें और विकास किए। पहले, उन्होंने आवेग और मैट्रिक्स डिस्चार्ज थेरेपी की क्रांतिकारी पद्धति की खोज की. और दूसरे प्राकृतिक स्वास्थ्य पेशेवर बेकलेयन ने ऊपर बताए गए गोल्डन स्ट्रीम प्रोग्राम के आधार पर अनूठे डायमण्ड शील्ड को विकसित किया। उन्होंने पहले इसे इसलिए अनुभव किया कि कुछ आवृत्तियों को अब शरीर के हार्मोनिक फ्रीक्वेंसी सिस्टम के डिक्रिप्टेड होने के कारण बदलना पड़ा और इस प्रकार अधिक परिशुद्ध आवृत्तियां इस्तेमाल की जा सकी → यह नियमन और शरीर के सामंजस्य के सुसंगत था।

और दूसो उन्होंने इस तथ्य के कारण इसे अनुभव किया कि डायमण्ड शील्ड की सभी आवृत्तियां एक दूसरी आवृत्ति द्वारा व्यवस्थित की गई जो पहली के एक परिशुद्ध गणितीय संबंध में है। इस प्रकार, इस अनुप्रयोग की प्रभाकारिता दोबारा कई गुणा हो गई।[/li_item][/checklist][content_boxes layout=”icon-on-top” title_size=”” icon_circle=”” icon_size=”” icon_align=”left” columns=”1″ margin_top=”” margin_bottom=”” class=”” id=””][content_box title=”” icon=”fa-star-o” backgroundcolor=”#f2f2f2″ iconcolor=”#ffffff” circlecolor=”#81d742″ circlebordercolor=”#ffffff” iconflip=”” iconrotate=”” iconspin=”no” image=”” image_width=”35″ image_height=”35″ link=”” linktext=”” linktarget=”_self” animation_type=”0″ animation_direction=”down” animation_speed=”0.1″] इस तरह, डायमण्ड शील्ड पहला सार्वभौमिक फ्रीक्वेंसी एप्लिकेशन है जो शरीर की संपूर्ण शिरोबिंदु प्रणाली (ऊर्जात्मक संरचना) को कुछ ही मिनटों में संतुलित और नियमन करता है। उन्नत डायमण्ड शील्ड जैपर IE में दो स्टेण्डर्ड क्लार्क प्रोग्राम शामिल हैं : लंबी अवधि का जैप प्रोग्राम और 20-मिनट अंतराल सहित 3-बार में 7-मिनट के प्रोग्राम। दोनों कार्यक्रमों में 33.3 kHz फ्रीक्वेंसी होती है। इसके अलावा इन क्लासिक स्टेण्डर्ड प्रोग्रामों में इसमें विशिष्ट अनुप्रयोगों (जैसे बेक ब्लड जैपर प्रोग्राम और बेकलेयन प्रोग्राम डायमण्ड शील्ड, Bo, Wf, Es, Rü) के लिए इसमें विश्टि फ्रीक्वेंसी प्रोग्राम होते हैं और आपकी इच्छानुसार विभिन्न चिपकार्डों का इस्तेमाल करते हुए प्रत्येक प्रोग्राम संचालित करने में सक्षम है।

डायमण्ड शील्ड में केवल छोटे और आसान किफायती उपकरण में 120 वर्षों का अनुसंधान समाहित है।[/content_box][/content_boxes][sharing tagline=”Share this article:” tagline_color=”” title=”” link=”” description=”” pinterest_image=”” icons_boxed=”” icons_boxed_radius=”4px” box_colors=”” icon_colors=”” tooltip_placement=”” backgroundcolor=”” class=”” id=””][/sharing]