Impulse discharge

संतुलित स्वास्थ्य के लिए दो तत्व आवश्यक हैं :

एक अभेद्य डायमण्ड शील्ड और एक नियमित रूप से संचालित मुक्ति।


इन दो सिद्धांतों के बीच क्या संबंध है?

हमारे शरीर की सतह पर शिरोबिंदुओं का सूक्ष्म रूप से बुना हुआ जाल है, जो जीवन ऊर्जा Qi का परिवहन करता है। इनमें से प्रत्येक शिरोबिंदु एक अंग का ऊर्जात्मक प्रतिनिधित्व और कार्यकारी परिपथ होता है और इसे आवंटित अंग के सभी आवेशों का परिवहन और नियमन करता है। यह जाल ऐसा है जो प्रतयेक हिस्से को आपूर्ति करता है और प्रत्येक अनावश्यक को निकाल देता है। इसलिए यदि हम प्रतिदिन संपूर्ण प्रणाली को कंपनों के माध्यम से सही आवेग प्रदान करें जेा प्रत्येक शिरोबिंदु के लिए होता है और इसके साथ-साथ विमुक्त करें, हम सुरक्षात्मक शील्ड को मजबूत करते हैं और सही अर्थों में इसे हानिकारक प्रदूषकों से मुक्त करते हैं।

वास्तव में यह गंदगी (आवेश) कहां जाते हैं?

वे हीं चले जाते हैं जहां प्रकृति के सभी स्खलन जाते हैं :जैपर द्वारा पृथ्वी में

पृथ्वी के अंदर!

इसलिए हमें सभी शिरोबिंदुओं को उनकी अपनी फ्रीक्वेंसी में उत्प्रेरण करना होगा,

इस प्रकार हम डायमण्ड शील्ड को इसका कार्य करने देते हैं :

  • इसके द्वारा सभी आवेशो का शरीर में समाधान और परिवहन हो जाएगा – आवेग –
  • औी स्वयं की ग्राउंडिंग के द्वारा हम इन आवेशों से छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं – मुक्ति –

अब डायमण्ड शील्ड प्रोग्राम की आवृत्तियों द्वारा उत्प्रेरित सभी शिरोबिंदु उनका पोषण और तालमेल कार्य हायिल कर सकते हैं।

आवेग मुक्ति एप्लिकेशन का विस्तार :

इस सहायक विशेषता को अन्य क्षेत्रों तक विस्तार करने में समझदारी है

जैपन द्वारा पृथ्वीग्राउंडिंग

प्राकृतिक चिकित्सा में विभिन्न रूझानों और फैशनों की उत्पत्ति असामान्य नहीं है, क्योंकि इस क्षेत्र में उपचारों की प्राथमिकताएं युगचेतना के साथ भी बदलती रहती हैं। आमतौर पर इनमें से ज्यादातर सनक उनके चरम पर पहुँच कर लुप्त हो जाती हैं। परंतु, कुछ अपवाद हैं, जिसमें गा्रउंडिंग के सबसे बाध्यकारी मुद्दे को शामिल किया जा सकता है, यद्यपि यह बहुत हद तक एक दोबारा खोज है, इसके साथ ही इस क्षेत्र में पहले ही सभी निश्चित रूप से चिकित्सकीय अनुप्रयोगों के साथ आते हैं – बेशक, निश्चित रूप से नीप्प अनुप्रयोगों के संदर्भ में “घास पर नंगे पांव चलना”।

विशेषकर हमारे दैनिक जीवन में, जिसमें हम विद्युत का इस्तेमाल करते हैं अपने आप में ही प्रमाण है, हमने एक महत्वपूर्ण तथ्य की उपेक्षा की है सिे हम केवल तभी समझ सकते हैं जब हम निम्नलिखित को याद करें : जब इंसुलेटेड फर्शों पर या प्लास्टिक की तली वाले जूतों के साथ चलते हैं तो अनिवार्य रूप से स्थैतिक विद्युत लगातार निर्मित होती रहती है, और जो – यही समस्या की जड है,- लगभग मुक्त नहीं होती या मुक्त नहीं की जा सकती है। इसके अलावा, विद्य़त उपकरणों का बढ़ता हुआ इस्तेमाल के साथ ही उपकरणों को स्टैंडबाई मोड पर छोड़ना दोनों का ही अर्थ यह है कि हम खुद को हमेशा एक विद्युत तनाव के क्षेत्र में पाते हैं। यह विद्य़त तनाव का क्षेत्र (वैकल्पिक करंट) मापनयोग्य भी है और परिसरों में लगभग 7.5 वोल्ट पर स्थित है (जीवविज्ञान स्तर पर स्वीकार्य मान 0.1 वोल्ट होता है)

इसे अलावा, एक स्थैतिक आवेश होता है। परिसरों में प्रत्येक मीटर के साथ इसमें 200 वोल्ट की वृद्धि होती है, अर्थात 4 मीटर के प्रत्ये फ्लोर के साथ हम 4 x 200 = 800 वोल्ट विद्युत तनाव के संपर्क में आते हैं। उदाहरण, जो लोग किसी बिल्डिंग की तसरी मंजिल पर रहते हैं, वे दिन-रात 3 x 800 = 2400 वोल्ट स्थैतिक आवेश के संपर्क में रहते हैं!

हम इलेक्ट्रॉनों के क्षेत्र में धनात्मक और ऋणात्मक के रूप में अन्तर करते हैं, जबकि पहला समूह, हालांकि, एक “खराब” रूप में निर्दिष्ट किया जाता है, क्योंकि ये हमारे शरीरों पर कणों के रूप में हानिकारक क्रिया करते हैं और इस प्रकार मुक्त कण अपमार्जकों द्वारा पकड़ने आवश्यक हैं। इसकी अपेक्षा, ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन “अच्छे” होते हैं जिनकी हमारे शरीरों को जरूरत होती है।

इस विषय की आगामी समझ के लिए मूलभूत ज्ञान काफी है।

ग्राउंडिंग पर किए गए प्रयोगों के परिणाम काफी प्रभावशाली निम्नलिखित घटना का सुझाव देते हैं : जैपर के प्रत्येक इस्तेमाल के बाद और तदुपरांत रोगी की पर्याप्त ग्राउंडिंग पर इनके मान में अभूतपूर्व गति से वृद्धि हुई हैं! प्राथमिक तौर पर बहुत उच्च आवेश वाले वे रोगी थे जिन्होंने ग्राउंडिंग में अच्छी प्रतिक्रिया दी। इसका परिणाम यह भी हुआ कि यक लोग विद्युत फ्रीक्वेंसी थैरेपी के प्रति ज्यादा खुले थे।

मूल रूप से मनुष्यों की तुलना बर्तनों के साथ की जा सकती है, जो आशुनिक समय में जानकारी की बाढ़ के कारण किनारों तक विद्य़त तनाव से भरे हुए हैं। नयी जानकारी के अंदर प्रवेश करने के लिए पुरानी जानकारी को मुक्त करना होगा। जानकारी के जुड़ते रहने से यह स्पष्ट हो गया है कि यही बेहतर होगा यदि मुक्ति निरंतर होती रहे और इसके साथ ही, “अच्छे” ऋणात्मक इलेक्ट्रॉन की चार्जिंग हो जाए।

तदनुसार, जैपर के उपयोगकर्ता को ग्राउंउि‍ग करनी चाहिए और विशेषकर कार्यक्रम की की समाप्ति के बाद ऐसी स्थिति में कुछ समय रहना चाहिए। यदि जनकारी, जोकि आवेग है, व्यक्ति को आपूर्ति की जाती है परंतु उसके बाद कोई ग्राउंडिंग नहीं की जानी चाहिए।

इस प्रकार, आवेग मुक्ति उपचार, संक्षिप्त में ID (जर्मन में IE) आरंभ हुआ। नोट : एक उपयागिता पेटेंट के रूप में पहले ही एक रजिस्ट्रेशन मौजूद है। इस प्रकार डायमझा्ड शील्ड जैपर IE बाजार में बिल्कुल अनॅठा है।

इसका एप्लिकेशन बहुत आसान है। रोगी को केवल निर्धारित ग्राउंडिंग केबल केबल की जरूरत होती है जिसे वह सामान्य सॉकेट में प्लग लगाता है। (प्लग की सेरेमिक पिनें सुचालक नहीं होती केवल सॉकेट में सही नाप प्रदान करती हैं। संपर्क केवल सॉकेट के सुरक्षात्मक अर्थ द्वारा प्रदान किया जाता है। परंतु, ध्यान दें कि आउटलेट को सबसे पहले यह निर्धारित करने के लिए जाँचना चाहिए क्या सुरक्षात्मक अर्थ शामिल की गई है।)

  • डायमण्ड शील्ड जैपर के साथ ग्राउंडिंग की प्रक्रिया

    बस ग्राउंडिंग केबल को डायमण्ड शील्ड जैपर से कनेक्ट करें और ग्राउंडिंग प्लग को सॉकेट में डालें। विदेश में, आपको व्यापारिक रूप से उपलब्ध सुसंगत एडेप्टर प्लग प्राप्त करना चाहिए।

    चेतावनी : यह एक प्लास्टिक  कनेक्टर है जिसका केवल ग्राउंडिंग से संपर्क होता है; इसमा मतलब है आप विद्युत लाइन से कनेक्ट नहीं हैं! जाँच करें, क्या आपका सॉकेट ग्राउंड हुआ है (आपके इलेक्ट्रिशियन या एक सॉकेट टेस्टर के इस्तेमाल द्वारा), अन्यथा आप इसके प्रभाव के हिस्से से वंचित रह जाएंगे।

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